मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की महत्वाकांक्षी आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना को अब नई गति मिलने जा रही है। राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण शहरी पुनर्विकास कार्यों में शामिल इस परियोजना के लंबित कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सख्त रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को एमडीडीए सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में परियोजना की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया और सभी विभागों को जून 2026 तक लंबित कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकताओं में शामिल इस परियोजना में किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि राजधानी देहरादून के भविष्य की व्यापारिक और शहरी संरचना को नई दिशा देने वाली योजना है। ऐसे में सभी संबंधित विभागों को तय समयसीमा के भीतर अपने दायित्व पूरे करने होंगे।
समीक्षा बैठक में प्रभावित परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, जबकि कुछ रजिस्ट्रियां अभी शेष हैं। इस पर उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। इसके लिए प्रत्येक बुधवार और शनिवार को विशेष रूप से रजिस्ट्री कार्य संपादित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को अनावश्यक परेशानी न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
समीक्षा बैठक में कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए कि परियोजना के अंतर्गत शेष सभी निर्माण कार्य जून 2026 तक हर हाल में पूरे किए जाएं। उपाध्यक्ष ने कहा कि राजधानी की व्यापारिक गतिविधियों को आधुनिक स्वरूप देने वाली इस परियोजना की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण करने तथा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आने पर तत्काल समाधान सुनिश्चित करने को कहा।
आढ़त बाजार परियोजना के साथ-साथ एमडीडीए की आलयम आवासीय योजना की भी समीक्षा की गई। बैठक में निर्देश दिए गए कि योजना के शेष निर्माण कार्य जून माह तक पूरे किए जाएं और पात्र लाभार्थियों को आवासों का कब्जा देने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए। उपाध्यक्ष ने कहा कि आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलना सरकार और प्राधिकरण की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बैठक में वर्तमान आढ़त बाजार क्षेत्र में मौजूद विद्युत लाइनों और अन्य आधारभूत सुविधाओं के स्थानांतरण की प्रगति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शासन स्तर से स्वीकृत लगभग 18 करोड़ रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग को शीघ्र हस्तांतरित की जाए, ताकि तकनीकी कार्यों में देरी न हो। एमडीडीए का मानना है कि आधारभूत सुविधाओं के स्थानांतरण के बाद परियोजना का अगला चरण और तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
समीक्षा बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ प्रभावित व्यक्तियों ने प्रतिकर राशि प्राप्त कर ली है, लेकिन उनके निर्माण अब तक नहीं हटाए गए हैं। इस पर उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे मामलों का वे स्वयं स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुये बल पूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जायेगी । उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी और सार्वजनिक हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
परियोजना समय पर पूरी करना सर्वोच्च प्राथमिकता : बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है और इसे तय समयसीमा में पूरा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। समीक्षा बैठक में सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लंबित कार्यों को जून 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। प्रभावित परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। विद्युत लाइनों एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के स्थानांतरण से जुड़े कार्यों को भी शीघ्र पूरा कराया जाएगा। जिन लोगों ने प्रतिकर राशि प्राप्त कर ली है लेकिन अब तक प्रभावित निर्माण नहीं हटाए हैं, उनके मामलों का मैं स्वयं स्थलीय निरीक्षण करूंगा। हमारा लक्ष्य है कि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो और देहरादून को आधुनिक एवं व्यवस्थित व्यापारिक अवसंरचना उपलब्ध हो।