प्रयागराज कुंभ मेले में सोशल मीडिया पर वायरल हुई निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंदगिरी महाराज की शिष्या हर्षा रिछारिया ने बुधवार को बाबा केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय करने के कार्यक्रम में भी भाग लिया।
इस दौरान हर्षा रिछारिया ने कहा कि उनका उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करना और मठ-मंदिरों की रक्षा के लिए कार्य करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोई साध्वी नहीं हैं, बल्कि धर्म की सेवा में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए जो भी कदम उठाने पड़ेंगे, वे पीछे नहीं हटेंगी।
धर्म परिवर्तन का बनाया गया दबाव
हर्षा ने बताया कि प्रयागराज कुंभ में उन्हें बेवजह ट्रोल किया गया और कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया कि उन्हें धर्म बदल लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा करना उनका संकल्प है और वे किसी भी विरोध से डरने वाली नहीं हैं।
गौ-गंगा की रक्षा पर दिया जोर
हर्षा रिछारिया ने गौ-गंगा की रक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जो लोग गाय और नंदी का उपयोग करने के बाद उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं, वे पाप के भागी बन रहे हैं। सनातन धर्म में गौ-गंगा का विशेष स्थान है और हमें इनकी रक्षा के लिए आगे आना होगा।
केदारनाथ में मांस-मदिरा पर रोक की मांग
हर्षा रिछारिया ने कहा कि केदारघाटी में मांस और मदिरा का सेवन नहीं होना चाहिए। यह केदारभूमि है, जहां भगवान शंकर स्वयं भक्तों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे कपाट खुलने के मौके पर भी केदारनाथ धाम जाएंगी।